आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुछ ख़्वाब अभी बाकी हैं

                
                                                         
                            कुछ ख़्वाब अभी बाकी हैं,
                                                                 
                            
कुछ रास्ते अभी अधूरे हैं,
ज़िंदगी ने जितने रंग दिए,
उनमें कुछ रंग अभी फीके हैं।

जो छूट गया, उसे यादों में रहने दिया,
जो मिल गया, उसे दिल से अपना लिया,
हर ठोकर ने कुछ नया सिखाया,
हर आँसू ने मुस्कुराना सिखाया।

अब मंज़िल की चाह कम है,
सफ़र को समझने की तमन्ना है,
कल क्या होगा, कौन जाने—
आज को जी लेने की आरज़ू है।

— ख़ुशी क़ुरैशी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर