कुछ ख़्वाब अभी बाकी हैं,
कुछ रास्ते अभी अधूरे हैं,
ज़िंदगी ने जितने रंग दिए,
उनमें कुछ रंग अभी फीके हैं।
जो छूट गया, उसे यादों में रहने दिया,
जो मिल गया, उसे दिल से अपना लिया,
हर ठोकर ने कुछ नया सिखाया,
हर आँसू ने मुस्कुराना सिखाया।
अब मंज़िल की चाह कम है,
सफ़र को समझने की तमन्ना है,
कल क्या होगा, कौन जाने—
आज को जी लेने की आरज़ू है।
— ख़ुशी क़ुरैशी
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