पड़ाव पर विश्राम मिले, नहीं शांति संतोष।
सभी पंथ हैं मार्ग पुरु, लक्ष्य स्वरुप उद्घोष।।
--- डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'
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