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सार्थक विचार बन मन तरंग

                
                                                         
                            सार्थक विचार बन मन तरंग ,
                                                                 
                            
उच्छल तरंग व्यापक उमंग।
उन्मुक्त समय बहता रहता ,
कुछ बिम्ब मात्र कुछ ठोस यत्न।
जीवन ढलता दिन ,मास , वर्ष ,
होता रहता क्रमिक विकास।
उज्जवल विचार से मन तरंग ,
उच्छल तरंग व्यापक उमंग।
अनुसरण बहुत करना पड़ता ,
कुछ बीत गए सिद्धांत जीर्ण ,
कुछ बंधन संस्कृति ला देती ,
कुछ दिखते बोझिल जीर्ण शीर्ण।
उन्मुक्त समय बहता रहता ,
कुछ बिम्ब मात्र कुछ ठोस यत्न।
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2 महीने पहले

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