आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

चिड़िया रानी

                
                                                         
                            चिड़िया रानी
                                                                 
                            
चिड़िया रानी।
मेरे घर भी ,
आओ ना ।
यहां पड़े हैं ,
दाना पानी ।
आकर इनको ,
खाओ ना ।
चिड़िया रानी
चिड़िया रानी ।
मेरे घर भी ,
आओ ना ।
क्यों ?दिन भर,
उड़ती रहती हो ।
आकर जरा ,
सुस्ताओ ना ।
चिड़िया रानी
चिड़िया रानी।
मेरे घर भी,
आओ ना ।
रंग-बिरंगे ,
पंख तुम्हारे ।
मुझको पंख ,
लगाओ ना ।
चिड़िया रानी
चिड़िया रानी ।
मेरे घर भी ,
आओ ना ।
आसमान से ,
बातें करते।
मुझको संग ,
उड़ाओ ना ।
चिड़िया रानी
चिड़िया रानी ।
मेरे घर भी ,
आओ ना ।
- प्रियंका कुमारी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर