आज़ काली घटाएं अजीब -सी छायी है,
आंखों में आंशु को ले कर
जी - भर के बरसने आयी है ।
हवाओं का रुत वो इस क़दर बदलने आयी है ।
बारिश की बुंदों से सब कुछ भिगोने आयी है
मिन्नतों से जैसे कोई याद कर रहा हो
आज ये अपने साथ कुछ वक्त लेकर साथ आयी है ।
आज़ काली घटाएं अजीब -सी छायी है ।।
-प्रीती गौतम
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