आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गरीब अपनी आंखों में दर्द छुपाए

                
                                                         
                            ओ भारत के बेटों, भारत तुम्हे पुकार रहा है
                                                                 
                            
इसकी करुण वेदना सुनो, तुम्हारा यौवन तुम्हे ललकार रहा है

है भारत मां की आन पे आई
अंधकार के बादल छाए
अपनी मां के ये पुकार
कैसे न तुमको तड़पाए

चारों तरफ हाहाकार है
अन्याय का ही राज है
अब तो लगत है कि जैसे
अमीरों का ही स्वराज है

हर दिन हत्या लूटपाट
हर दिन एक चिराग बुझता है
गरीब अपनी आंखों में दर्द छुपाए
मन ही मन में रोता है

घूसखोर बन चुके है
सारा तंत्र सारे अधिकारी
अपने लिए ही जीते हैं
भूल गए हैं अपनी जिम्मेदारी

भारत को जरूरत है तुम्हारी
ओ भारत के युवा वीर
अब तुम्हारे हाथ में ही
है भारत की तकदीर

खुद के लिए लड़ना सीखो
एक होकर नारा लगाओ
साथ मिलकर भारत बचाओ
हम भी आए,तुम भी आओ
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
1 सप्ताह पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर