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फसाना ए वादा ए उल्फत

                
                                                         
                            हो गए तुम मौका परस्त जब जान के बेरुखी सामने आऊं कैसे गिर गिर के तेरी नजरों से रस्म ए वफा निभाऊं कैसे
                                                                 
                            
खाया ठोकरें मगर मिला ना मंजिल कभी गर तू है खफा मुझसे तो निभा कर वफा शिद्दत से नज़र अब मिलाऊं कैसे
सच ये तेरे ही फिराक ने की जिंदगी अता मेरी संभाल कर खुद को ही बगैर तेरे मर्जी के मुताबिक सामने आऊं कैसे
आप आए तो गम ए हयात याद आ गया दिल पे जो गुजरी हमें अब ये बताओ होकर मायूस दिल को समझाऊं कैसे
सुना के फसाना ए दिल करना पड़ा याद हमें गुज़रा जमाना तेरा राह ए वफा बढ़ा के बेचैनियां तुम्हें मैं आजमाऊं कैसे
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2 दिन पहले

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