मैं मुफलिसी में किस्मत की लकीरों पे भरोसा करने क्यूं लगा ये जानते हुए लकीरों का काम है खेल खेलना
मुझे इंकार करने वाले जो दर्द दिया तूने कोई गम नहीं लिखा है मेरी किस्मत में ही आंसुओं से खेल खेलना
या खुदा कभी फुर्सत में सदा मेरी भी याद कर लेना मेरा क्या सीखा है मैने भी तो अब गमों से खेल खेलना
कभी सोचा लोग तुम पर भरोसा क्यूं करते हैं किसी बेगुनाह पे जुल्म करने से पहले रहमों से खेल खेलना
निगाह मेरी हर रोज तेरा राह देखती है मुझ पर कोई जुल्म करने से पहले तुम मेरी सदा से खेल खेलना
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