जिक्र अपनी ही वफाओं का करने लगे हैं और देख के अचानक आज़ सामने बेचैन दिल को भी हम सताने लगे हैं
करके मनमनियां तू अपनी दर्द मेरा और बढ़ा जाओगे जान कर तुमको फरिश्ता चिराग ए दिल हम जलाने लगे हैं
जिक्र अपनी बर्बादियों का कर सकता नहीं किसी से करके याद गुजरा जमाना ख्वाहिशें अपनी और बढ़ाने लगे हैं
आकर दिल के समंदर में हाल ए गम मेरा तुने भी तो पूछा कहां समझ के बदनसीबी अपनी फासला बढ़ाने लगे हैं
करके महसूस दर्द आकर कभी दिल की बगिया में हाल ए गम पूछ लेते जान के तुम्हें अपना दर्द हम बताने लगे हैं
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