आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फसाना ए दर्द ओ तमन्ना

                
                                                         
                            बड़े सलीके से तुमसे ही अर्ज करना है जो खोया मैने तुम्हें दिल देकर हमें वो हिस्सा तेरे दिल से कायदे से निकालना है
                                                                 
                            
ये रूह भी जो दफन है बरसों से गर तुम ही मदद करोगे तो हमें बदन के मलवे से कोशिश कर इसे जिंदा निकालना है
सोच कर गम शनास न मिल जाए कहीं बेच के सुखन भी जीने खातिर अब हमें दिल तोड़ के भी तुमसे दिल लगाना है
वक्त से धोखा भी हम खाए तुम्हें बतलाना है मैं इक किरदार से तंग आ चुका हूं गर तुम्हें मिले फुर्सत तो हमें बताना है
कभी दिल में ख्याल आया निभा कर अहद ए वफा मिला क्या हमें बैठे भी हैं बेचैन कब से ये सच भी तुम्हें जानना है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर