करूं भी अब क्या हमें बर्बाद होना पड़ेगा मिटा कर अरमां सारे जश्न ए बर्बादी अब तो हमें मानना पड़ेगा
मिल कर तुमसे दिल से जुदा ना हो पाएं हम कभी होकर मायूस अपनी जिंदगी से दर्द और बढ़ाना पड़ेगा
मत जाना तुम मेरी नादानियों पर किया यकीं जिस पर निकला बदगुमान सोच के अरमां मिटाना पड़ेगा
किया तुमने ऐतबार कब मेरी वफाओं पर करके गुजारा किसी तरह मुश्किलें अपनी अब बढ़ाना पड़ेगा
देख के अंदाज़ मिजाज़ हमें सोचना पड़ा है और बातों बातों में समझ के तुम्हें अपना चुप होना पड़ेगा
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