नींद आ रही हमें चैन से सोने दो किया जो आपने मुझ पे जुल्म ओ सितम अब तो राह ए वफा हमें तुम खो जाने दो
भटक के सेहरा में होकर मायूस प्यासा हमको रह जाना पड़ा है तुम्हें ढूंढने वास्ते अब तो हमें मौत को गले लगाने दो
खाकर धोखा बिखरती तमन्नाओं से चिराग़ ए दिल बुझाना पड़ा जीने में रखा क्या अंजाम ए वफा हमें तुम सोचने दो
ये ज़माना है जहां यकीं हर इक पर करना अच्छा नहीं समेट के बिखरती तमन्नाओं को हमें चिराग़ ए दिल जलाने दो
मेरी बर्बादियों पर हसने वाले गर तुम्हें कोई वास्ता नहीं तो क्या हुआ हमें अब होकर मायूस फासला तुमसे बढ़ाने दो
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