करके इंतजार आपका ही किया दिल को बेकरार बहुत अब तो शायद नसीब में भी उम्मीद दिल्लगी की ना रही
दिल की दुनिया उजड़ गई है जी रहा अजीब कशमकश मैं करूं भी मलाल कैसे अब तो दिल में भी खुशी ना रही
गुज़ार दी मैने तमाम उम्र तेरे ही इंतजार में करूं भी क्या यहां तो ना बात ईमान की रही और कोई खुदी ना रही
समझा कर बेचैन दिल को भी ना हुआ मैं कामयाब कभी लड़ कर तन्हाइयों से मिलने की भी कोई सूरत ना रही
हिसाब बरबादियों का देने से फायदा क्या सामने आपके सच भी टिकती नहीं तभी तो दिल में कोई खुशी ना रही
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