देख कर नाज़ ओ अदा तेरा हम घबरा गए अंदाज़ ए उल्फत में मुझ पर आप क्या क्या जुल्म ओ सितम ढा गए
हमने गिला करना जब चाहा पल भर में मिजाज़ बदल कर आप गुज़र कर सामने मेरे कुछ और सितम ढा गए
कहना तो हमें था बहुत कुछ मगर कह ना पाए हैं तुम बदल कर अंदाज ए मोहब्बत मुझ पर और जुल्म ढा गए
देखा जब मैंने रंग ए बहार चमन में फितरत के मुताबिक तो हम तुमसे ही मिलने खातिर लौट कर फिर आ गए
तुम्हें क्या बताऊं ओढ़ लिया है मैंने चद्दर रस्म ए उल्फत की अब सजा के दिल के अरमां सामने तेरे हम आ गए
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