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फसाना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            कुर्वतों से कब तक हम दिल बहलाएंगे और तुम झूठ कि रोटियां सेंक कर दिल अपना बहलाओगे
                                                                 
                            
था दिल जब तक माइल तुझ पर जीना हुआ मेरा मुश्किल तुम बढ़ा कर फासला दूर कहां जाओगे
बा जाहिर सादगी देख कर तुम हैरान हो गए तुम भी कुर्वतों से दिल अपना ही कब तक बहलाओगे
बाद इक गर्द जब से हुआ तू ओझल तुम सा न मिला कोई हमें मिला के खाक में किसे दर्द सुनाओगे
तूने मुझसे गुफ्तगू किया आहिस्ता से खिल उठा दिल मेरा ये बता तू दर्द सुनने पास मेरे कब आओगे
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3 महीने पहले

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