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दास्तां ए नाकाम जिंदगी

                
                                                         
                            सुना कर बात दिल की मैं कुछ करना चाहता हूं मिले हो तुम बाद मुद्दत भूली यादें मैं ताज़ा करना चाहता हूं
                                                                 
                            
बढ़ाया फासला तुमने जब से दिल धड़का जरूर मजबूर मैं इस कदर जो होकर सामने चुप रहना चाहता हूं
हुआ है ख्याल ओ ख्वाब में मोहब्बत जब से तुमसे होश ओ हवास खो बैठे ये सच तुमसे कहना चाहता हूं
सच तो हुआ मुद्दत खुद को हमें गुमनाम किए हुए तलाश तुम्हें करते करते हुआ जो दर्द मैं कहना चाहता हूं
बोल ऐ दिल ए बेकरार मिलने की सूरत है या नहीं मिला कर खाक में खुद को अर्ज तुमसे करना चाहता हूं
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2 महीने पहले

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