ना थी मेरी आरजू तेरे दिल में हमें ठिकाना चाहिए मिला तू हमेशा खुशबू की तरह मगर किया न कभी वादा
तू अपनी दुनिया में मस्त और मैं अपनी दुनिया मे खुश फिर तू दिल में आ गया कैसे और न किया कभी वादा
माना कि हम ही हैं सारी बुराइयों के सबब सितम ये कि तूने भी पहचाना नहीं बढ़ा कर दर्द न किया कभी वादा
खता क्या मेरी तुमने बताया भी नही बढ़ा कर मोहब्बत मेरी बुजदिलों की तरह तुमने ही ना निभाया कभी वादा
है नसीब मेरा खोटा मैं समझ गया हूं तभी तो बदनसीबी है मिला मेरी किस्मत को और तूने न किया कभी वादा
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