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बदनसीब दिल

                
                                                         
                            मैं दर्द अपना किसे सुनाऊं मर मर के जिंदा हूं कैसे अब तलखी ए हयात सोच कर घबरा गया
                                                                 
                            
हूं बदनसीब कितना तुम क्या जानो मैं तो आदमी हूं कोई फरिश्ता नहीं सोच कर घबरा गया
कांटों पे चल रहा हूं गिला नहीं हमें शायद तू खुश है देख के बर्बादी मेरी सोच कर घबरा गया
मैं गर्दिश ए हालात में जी रहा कैसे तुम भी न समझ पाओगे मिटा कर सारी हसरतें घबरा गया
तू कितना अच्छा था बुरा होने पहले बढ़ाया तूने ही जब से फासला ये सोच कर घबरा गया
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6 घंटे पहले

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