देख कर ख्वाब मीठे हर रोज़ सुबह ओ शाम मिलेगी खुशी हमें कभी ना कभी बेचैन दिल अपना मै बहला रहा हूं
मिलेगी सौगात ए खुशी हमें भी किसी रोज़ बढ़ा कर ख्वाब ओ तमन्ना दिल में चिराग़ ए दिल आज़ मैं जला रहा हूं
लाकर तुम्हें मीठे ख्वाबों में निभाया है रस्म ए वफा हमने बड़ी शिद्दत से सोच के अंजाम ए वफा दर्द बढ़ा रहा हूं
सच ये भी मिल के तुमसे दिल से ना हो सके जुदा कभी जान के बेरुखी आपकी दिल अपना ही मैं जला रहा हूं
बढ़ा कर मीठे ख्वाब मेरे तमन्ना दिल की मिटा दिया तुमने करके गुजारिश तुमसे नींद अपनी मैं उड़ा रहा हूं
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