आया जब भी मैं सामने तेरे छुपाया नहीं दर्द कभी मैने समेट के बिखरती यादों को समझाया तुम्हें बार बार मैने
कोस के किस्मत अपनी मिला कब चैन ओ सकूं कभी दिया जो दर्द बेशुमार तुने निभाया भी फर्ज बार बार मैने
और तुम तो कभी आकर ख्वाब में हुनर अपना दिखा जाते हो करके कोशिश तमाम सुनाया दर्द बार बार मैने
खुशियां मेरी मिटाने वाले दर्द भी सुना कहां कभी तुने जान के महरूम जिंदगी सुनाया तुम्हें सच बार बार मैने
मेरी नाकामियों पर हसने वाले दिल पर गुजरी है कह ना पाया किसी और से ये सच बताया तुम्हें बार बार मैने
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