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अफसाना ए बेचैन जिंदगी

                
                                                         
                            तू जबसे हुआ जुदा हम घुंट जहर का पीने लगे तुम्हारी याद में अब होकर बेचैन हम जख्म अपना बढ़ाने लगे
                                                                 
                            
जख्म जब हद से ज्यादा लगा बढ़ने तो आंसू पीने लगे इक झलक देखने खातिर हम तेरी गली से गुजरने लगे
फिक्र जेब में रख कर मैं जी सकता कभी नहीं दिल में अब दिया आस का जला के दर दर तुमको ढूंढने लगे
बिछड़ कर मुझसे शायद किसी और से दिल लगा लिया तूने जो दर्द दिया महसूस कर अब आंसू हम पीने लगे
कोशिश तो रही हमेशा कभी तेरे काम मैं आ सकूं तूने किया हमें इंकार जब से चश्म सुबह से आंसू बहने लगे
दर्द अपना बयां तुमसे कैसे करूं होकर मजबूर दिल तोड़ने लगे तुम न हो सकोगे मेरे सोच कर दूर होने लगे
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3 दिन पहले

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