मां बाप की सेवा कर लो ,थोड़ा सुबह शाम,तुम्हारा नाम बढ़ेगा ।
सारथी हमारे हैं ओ, करते हैं प्रेम निस्वार्थ रे,
कदम कदम पर देते, सिख हमे बारम्बार रे,
उनके चरणों में बिताओ , थोड़ा सा दिन रात, तुम्हारा नाम बढ़ेगा।
प्रथम गुरु हैं ओ,करते हैं अपना बलिदान भी,
सादर आदर कर लो, रखो सहज व्यवहार भी,
मात पिता का साथ निभाना ,हो बारिश या छाँव, तुम्हारा नाम बढ़ेगा ।
बढ़ती उमर में रखो, थोडा सा उन पर भी ध्यान जी,
दर्द की दवा ना चाहिए , ना चाहिए धन धाम जी,
प्रेम भाव से बात करो तुम , बैठ के उनके साथ, तुम्हारा नाम बढ़ेगा ।
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