वफ़ा करने की भी एक इंतहा होती है
खुद को साबित करने की भी एक पराकाष्ठा होती है।
जिसके लिए वो ताउम्र वफ़ा के कशीदे पढ़ता रहा
वही एक दिन बेवफाई का पैगाम देकर चला गया।
किताबों को पढ़ने का शौक कुछ इस तरह जिंदा था
हरेक पुस्तक का कुछ निचोड़ निकल लेता था।
इंसानों को पढ़ने का हुनर कभी सीखा ही नहीं
आज उन्हीं किताबों में उसकी बदहाली का जिक्र था।
काश किसी ने चेहरे पढ़ने की कोई किताब लिखी होती
खुराफाती इंसानों के सोचने की ताकत लिखी होती।
चेहरे के पीछे की साजिश से कोई धोखा नहीं खाता
आम इंसान चेहरे की साजिश का शिकार ना होता।
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