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नूतन राव के दोहे

                
                                                         
                            चंद्र और रवि की प्रभा, राहु केतु खा जाय।
                                                                 
                            
जनमानस की भ्रांति पर, नूतन मन मुस्काय।।
-सत्येन्द्र पटेल "नूतन राव"
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2 सप्ताह पहले

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