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ओड़िशा की धरती

                
                                                         
                            तो एक बार ओड़िशा की मिट्टी को महसूस कीजिए...
                                                                 
                            

जहाँ जगन्नाथ पुरी में हर साँस भक्ति बन जाती है,
और प्रभु की एक झलक से ज़िंदगी धन्य हो जाती है।

जहाँ कोणार्क का सूर्य मंदिर पत्थरों में सूरज की कहानी लिखता है,
हर नक्काशी सदियों से इतिहास की ज़ुबानी लिखता है।

जहाँ भुवनेश्वर का लिंगराज मंदिर शिवत्व का अद्भुत प्रकाश है,
हर "हर-हर महादेव" में बसता अटूट विश्वास है।

जहाँ उदयगिरि–खंडगिरि की गुफाएँ आज भी समय से बातें करती हैं,
और हर दीवार सभ्यता की अमर गाथा कहती है।

जहाँ नंदनकानन चिड़ियाघर प्रकृति का मुस्कुराता हुआ उपहार है,
हर जीव में ईश्वर की बनाई दुनिया का विस्तार है।

जहाँ चिल्का झील की लहरें परिंदों के गीत सुनाती हैं,
और दूर देशों से आई उड़ानें भारत का मान बढ़ाती हैं।

जहाँ पुरी का समुद्र लहर-लहर ये पैग़ाम सुनाता है—
"जो प्रभु पर भरोसा रखता है,
वो कभी अकेला नहीं रह जाता है।"

ऐ मुसाफ़िर...
अगर सफ़र में सुकून ढूँढ़ना हो,
तो ओड़िशा की राह पकड़ लेना...

क्योंकि यहाँ मंदिर सिर्फ़ पत्थर नहीं,
आस्था की धड़कन हैं...

यहाँ समुद्र सिर्फ़ पानी नहीं,
प्रकृति की खुली हुई कविता है...

और जगन्नाथ की नगरी सिर्फ़ एक शहर नहीं,
करोड़ों भक्तों की धड़कन है...

 
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3 महीने पहले

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