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नशीली आंखे

                
                                                         
                            तुझसे चुलबुलापन मुझ में, ना हो तो सब वीरान है l
                                                                 
                            
तेरे होठों की रंगत से, रंगीन बने जहान है ll
चूड़ियां ज़ब खनकती तेरी, सजे सरगम की साज है l
चलती चाल पग बजती नुपुर,मन लुभाती आवाज है ll
लहराये ज़ब चुनरी तेरी, मंद मंद फिर पवन बहे l
चलती इतराके राहों पर, लचक कमर की कौन सहे ll
खुलती ज़ब कजरारी आंखे, लगे अभी ही भोर हुई l
मूंद लेती नशीली पलके, ढली साँझ फिर रेन हुई ll
सागर सी गहरी आँखों की, गहराई ना नाप सके l
डूबे बड़े तैराक इनमें, कातिल को ना भाँप सके ll
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2 महीने पहले

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