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पर मुहब्बत निभा नहीं सकता

                
                                                         
                            पेड़ से टूटा हुआ पत्ता है तू,
                                                                 
                            
वापस टहनी पर जा नहीं सकता।
मुहब्बत के दावे करना और बात है,
पर मुहब्बत निभा नहीं सकता।

दुनिया जानती है हम दोस्त हैं,
पर तेरे दिल की तू जनता है।
जो दिल की बात दिल में है,
जमाने को तू बता नहीं सकता।

शिकायत है तुझे मुझसे,
की मै इज़हार नहीं करती,
या तुझसे प्यार नहीं करती
मत आजमा मेरी उम्मीद,
की जिन्हें टूटने से ...
तू बचा नहीं सकता।

तेरे कांधे पे रख कर सर,
मै अक्सर सो जाती हूं।
जब टूटी नींद होश आया,
तू मुझे अपना नहीं सकता।

तू मेरे साथ है न पास,
फिर भी कैसा ये बंधन है?
पास भी आ नहीं सकता।
दूर भी जा नहीं सकता।

मुक़द्दर में लिखा क्या है ?
न तू जाने न मै जानू...
मै तेरी हो नहीं सकती,
तू मुझको पा नहीं सकता।

मै अक्सर भूल जाती हु,
चीजों को यूंही रखकर।
मै तुझको याद आऊँ के नहीं,
पर... तू मुझे भुला नहीं सकता।
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2 महीने पहले

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