मोहब्बत होती तो कब का भूल चुके होते
तू तो अब आदत हो चुका है.....
जो जाता नहीं दिल से।
माँ कहती थी बेचैनियां हो तो मिल लो
फिर और बढ़ जाती हैं मेरी बेचैनियां,
तुझसे मिल के....
ग़र आँखों में समंदर होता....
तू कब का डूब चुका होता।
शुक्र कर अभी भी जिंदा है
इन निगाहों में मयखाना जो बना रखा है।
तुझे याद न आए मेरी....परवाह नहीं इसकी
तूने कहां इंसान समझा है मुझको।
अरे फ़रिश्ते हैं हम.......
जो यादों में भी चांद रात आते हैं।
कितना डरते हो हंसने से तुम,
जरा बताओ कौन तुम्हे रोकता है?
कभी हाथ नहीं थामते मेरा..
इतना तो कहो क्या कोई है, जो टोकता है?
अरे गली के उस मोड़ तक तो साथ चल...
उम्र भर का हिसाब कौन देखता है।
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