कुछ लोग होते हैं
मिजाज़ के अच्छे
और बेहद संवेदनशील
एवं संस्कारी
देते हैं ये लोग
बड़े-बूढ़ों को अपने
यथोचित मान-सम्मान
तथा करते हैं
क़द्र उनकी
जबकि होते हैं कुछ लोग
तुनक मिहाज़ के
और संस्कारहीन
जो बड़े-बूढ़ों के साथ अपने
चूकते नहीं
कटु और ओछा व्यवहार तक
करने से
बल्कि रहते है वे तैयार
करने को उन्हें अपमानित
हरदम
ऐसे लोग
बड़े-बूढ़ों का अपने
तोड़कर दिल
पाते नहीं उनसे दुआ
और आशीर्वाद
बात है यह सत्य
एकदन सोलह आने
निर्विवाद।
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