दिल में एक तमन्ना हो,
छटा सावन की छाई हो
और मस्त पुरवाई हो।
दिल में एक तमन्ना हो...
बरखा की मीठी मनुहार हो,
बौछारों की तरुणाई हो।
धड़कन में जागे अनुराग सा
मन की पावन गहराई हो।
नयनों में सजती आस रहे,
,प्रियतम की याद सताई हो।
दिल में एक तमन्ना हो...
दूरी की दीवार न हो,
अँखियों में न तन्हाई हो।
(मधुर) यादों के इस उपवन में,
सांसों ने प्रीत जगाई हो।
हृदय में उनका आभास रहे
अब जन्मों की शनासाई हो।
दिल में एक तमन्ना हो...।
-प्रभात कुमार “प्रभात”
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