तान ली चादर रात ने और अँधेरा हो गया,
टहनियों पर फिर लौटी कोयल, जंगल में पंछी डेरा हो गया
चिड़िया लायी फिर दाना, झींगुर टिमटिमाते हैं
ऐसे लगते मानो वातावरण में गीत सा गाते हैं,
सूरज मानो थक गया है सबको उजियारा देते- देते
सोया पाँव पसार कर अपनी खटिया पर पड़े हुए
चंदा मामा ने फिर मानो अपनी कमान संभाली है
तारों ने भी पीछे- पीछे उससे होड़ लगा ली है
चाँदनी आई फिर फेली सब जगह बहते हुए
देते है सब यही संदेश सब अपना कर्म करते हुए
अपना कर्तव्य तो मनुष्यों जग में सबको निभाना है
हँसकर करलो या फिर रोकर सबको गीत सुनाना है
अपने कर्तव्यों से तो प्रकृति भी ना बच पाई है
फिर तू क्या समझता ख़ुद को ?
क्या तू भगवान का भाई है??
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