चलो बादलों के संग चलते हैं,
हवा में ज़मीन की खुशबू से कुछ बातें करते हैं।
भीगी-भीगी राहों पर नंगे पाँव चलें,
मिट्टी की सौंधी महक को साँसों में भरें।
जो बातें अधूरी थीं, आज उन्हें कहते हैं,
चलो बादलों संग चलते हैं।
दूर कहीं खेतों में हरियाली मुस्काए,
पेड़ों की डालियों पर पंछी गीत सुनाए।
बारिश की बूँदों में कुछ सपने चुनते हैं,
हवा के संग उड़ते हैं, बादलों से मिलते हैं।
न कोई मंज़िल हो, न कोई ठिकाना,
बस बारिश हो, मिट्टी हो और तेरा मुस्कुराना।
कुछ पल इस भागती दुनिया से दूर निकलते हैं,
चलो बादलों के संग चलते हैं l
हवा में ज़मीन की खुशबू से कुछ बातें करते हैं,
चलो बादलों के संग चलते हैंl
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