गुरु से ज्ञान मिल पाना, ख़ुदा की समझो रहमत है
सिखाया जो उन्होंने, वो हमारे हक़ में नेमत है
ज़हालत का मिटाया, इल्म की शम'अ जला कर तम
दिखाई राह मक़सद की, ये उनकी ही इनायत है
विचारों के ही सुंदर बीजों से, खिल कर बने हम वृक्ष
विचारों से ही, अपने मन में आई इक सदाकत है
इमारत देखी सब ने, नींव का पत्थर नहीं देखा
गुरू को नींव का पत्थर ही, बन जाने की आदत है
गुरु बिन तो बुलंदी, हो नहीं सकती कभी हासिल
गुरूओं की दुआ, दुनिया की सबसे पाक दौलत है
ख़ुदा से बढ़, गुरु को माना है सबने ही दुनिया में
गुरु का सजदा करना भी तो, रब की ही इबादत है
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