आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

गुलाब इश्क़ का

                
                                                         
                            गुलाब इश्क़ का कबूल कर लो तुम मेरे सनम
                                                                 
                            
ये दिल में इश्क़ मौन सा ही भर लो तुम मेरे सनम

न मुख से तो कभी भी कह सकेंगे हाल अपना हम
समझ सको तो दिल में कर ही घर लो तुम मेरे सनम

जहां ने सारे मुझको दुख ही तो दिया है आज तक
कभी तो प्यार से ये ग़म भी हर लो तुम मेरे सनम

ख़याल तेरा मुझको यारा रात दिन ही रहता है
महक सा बन के मुझमें यूँ बिखर लो तुम मेरे सनम

मेरे तो रोम-रोम में बसे हो ख़ुशबू बन के तुम
यूँ रूह में मेरी सदा उतर लो तुम मेरे सनम
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर