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ये मेरा मन

                
                                                         
                            'ये मन मेरा'
                                                                 
                            

ये मेरा मन,न जाने कहाँ ले जाता है,
कभी हँसाता है, कभी चुपके से रुलाता है।

जिस राह पर जाना नहीं चाहती मैं,
उसी राह पर अक्सर मुझे ले जाता है।

समझाऊँ इसे लाख, फिर भी नहीं मानता,
मेरी सुनता नहीं, बस अपनी ही ठानता।

कभी बीते कल की यादों में ले जाता है,
कभी आने वाले कल के सपने दिखाता है।

न जाने कैसी इसकी अपनी ही दुनिया है,
कभी सुकून देता है, कभी बेचैनी बढ़ाता है।

कभी खामोश रातों में मुझसे बातें करता है,
कभी मेरी आँखों में छुपे राज़ पढ़ता है।

कभी पुरानी यादों की गलियों में ले जाता है,
कभी नए ख्वाबों से मेरा दामन भर जाता है।

इसे रोकूँ तो और भी दूर निकल जाता है,
इसे समझूँ तो खुद को समझा जाता है।

न जाने कैसी इसकी अपनी ही कहानी है,
कभी मेरी खुशी, तो कभी मेरी परेशानी है।” ✨
- परी नागर
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2 महीने पहले

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