आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

"धैर्य और संतोष"

                
                                                         
                            राहें अगर हों धुंधली,
                                                                 
                            
मन में जगाओ धैर्य तुम।
जीवन सरल हो जाएगा,
रखो हृदय में शौर्य तुम।

चलता रहेगा वक्त यह,
बदलेगा हर इक दौर भी।
सुलझेगी अविरल जिंदगी,
आएगी सुंदर भोर भी।

बेचैनियों के जाल में,
घिरता यहाँ इंसान है।
व्याकुल बटोही राह का,
खोता स्वयं की शान है।

मन का भटकना छोड़ कर,
कर लो समय का सामना।
धीरज थमेगा हाथ जब,
पूरी होगी कामना।

संतोष का जब साज हो,
बजती मधुर झंकार है।
तृष्णा सभी मिट जाती है,
होता सुखी संसार है।

छोटा सफर इस श्वास का,
सार्थक इसे तुम रूप दो।
संतोषमयी संगीत से,
जीवन को पावन धूप दो।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर