वर्षों बीतते बीतते,
प्यार भी बदलने लगता है।
फिर किसी की परवाह नहीं,
ऐसा होने लगता है।
प्यार को भी करते करते,
यह भी कम होने लगता है।
वक्त का तकाजा कहो,
या फिर कहीं.....,
जी और जगह लगने लगता है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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