सब संस्कारों का खेल है,
किसी के साथ थोड़ी सी भी दया करो,
तो वह अहसान बंद हो जाता है।
यदि तुम किसी को खून दो,
तो वह उसको...,
पानी के गिलास में ही भुला देता है।
-चंद्र दत्त शर्मा
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