सावन बीता भादों बीता बदल गई समीर,
दिन में उमस, धूप की नहीं बदली तासीर।
क्वार आने से हिरन भी पड़ जाता काला,
इसमें भी चैन नहीं ज्यों की त्यों रहे पीर।।
-चंद्र दत्त शर्मा
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