खूब हँसो मस्ती करो,
ये जीवन कब तक का?
मिलते रहो मिलाते रहो,
ये जीवन अपने पन का।
ईर्ष्या द्वेष से बचकर रहो,
प्यार बरसेगा जन जन का।
प्रीत कभी ना हो जाए कम,
रिश्ता बनेगा तन मन का।
-चंद्र दत्त शर्मा
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