उन राहों को गमन करना आसान नहीं,
जहां हम कदम ना मिलते हों।
वो हर गुलशन किसी काम का नहीं,
जहां अमन के गुल ना खिलते हों।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X