जीवन है एक ऐसी किताब
जिसका एक भी पल, सांस
वापस लौटकर नहीं आते
तो भी मानव दुर्गुणों को पाल
असंयमित जीवनचर्या अपना
अतीत के पछतावे में
भविष्य की चिंता में
अपने वर्तमान के अनमोल पल
यूं ही गंवाता रहता
कटु शब्दों रूपी वाण चला
दूसरों को आहत करता रहता
मौन रह कर, कम बोलकर
दुश्मनो और विवादों को जीता जा सकता
प्रकृति में बहुत कुछ है
कुछ उपयोगी, कुछ अनुपयोगी
स्वास्थ्य के लिए संयमित रह कर
बीमारी से बचा जा सकता
जितनी कम हो जरूरत
उतनी होती अच्छी सूरत
अपनी प्रतिभा, प्रेरणा को
संजोय रखने का तंत्र ही कहलाता
सुखी जीवन का मंत्र
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