आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पर दिल उदासी भरा दिखलाता है

                
                                                         
                            मुस्कान है हृदय का स्पंदन
                                                                 
                            
मुस्कान है आत्मा का गुंजन
मुस्कान में है संवाद
वह आंखों से झलक जाता
मन को आलोकित कर
सबको प्रफुल्लित कर जाता
जब श्रमिक दिन भर की थकान लिए
अपने घर को लौटता है
बच्चों के अधरों की मुस्कान देख
सारी पीड़ा भूल जाता है
मुस्कान है आनंद का प्रकाश
करुणा संवेदना, स्नेह उजास
कभी चेहरा मुस्काता है
पर दिल उदासी भरा दिखलाता है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
18 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर