मैं सम्राट अशोक हूँ,
मैं मौर्य वंश का गौरव हूँ।
मैं चक्रवर्ती सम्राट हूँ,
मैं अखंड भारत का स्वप्न हूँ।
मैंने कलिंग युद्ध में रक्तन देखा,
फिर करुणा का पथ देखा।
मैंने हिंसा छोड़ी, धर्म अपनाया,
मैंने विश्व को शांति का संदेश सुनाया।
मैं धम्म की भावना फैलाता हूँ,
मैं प्रजा का हित सर्वोपरि मानता हूँ।
मैंने स्तूप, विहार बनवाए,
मैंने धर्म के शिलालेख खुदवाए ।
मैं न्याय, दया और सत्य का मार्ग हूँ,
मैं प्रजा के हृदय में बसता हूँ।
मैं सम्राट अशोक हूँ,
मैं इतिहास का अमर संदेश हूँ।
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