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मैं... (विश्वास की उड़ान)!

                
                                                         
                            मुझे उड़ने के लिए किसी बंधन को तोड़ना नहीं पड़ा,
                                                                 
                            
क्योंकि मेरे पंखों को धरा की जड़ों से जोड़ा गया।
मैं बेखौफ होकर उस अनंत आकाश को नापती हूँ,
क्योंकि मैं संस्कारों के दीप से दिशा जगमगाती हूँ।

लोग कहते हैं कि मैं बेबाक कहती हूँ,
पर उन्हें क्या पता, मैं वचनों में सत्य तोलती हूँ।
मेरी यह शक्ति किसी विद्रोह का नाम नहीं,
यह तो मेरे गृह से मिली सीख का संदेश है।

मैं हर रीति को निष्ठा से निभाती हूँ,
शीर्ष पर पहुँचकर भी झुकना जानती हूँ।

मेरी स्वतंत्रता कोई स्वच्छंद छूट नहीं,
यह तो मेरे अपने जन की दी हुई सबसे बड़ी धरोहर है।

मैं आज भी निर्भय, बेखौफ आगे बढ़ती हूँ,
क्योंकि मैं जानती हूँ—
मेरी हर उड़ान के पीछे मेरे माता-पिता का निष्कंप विश्वास खड़ा है।
 
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2 महीने पहले

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