बन सको तो समुद्र खारा बनो,
कि बोतलों में बंद न किया जा सको।
अक्सर नदियों का पानी ही,
बोतलों में भरा जाता है।
बोलो, जितना मन करे बोलो!
चुप रहने का कोई सबब नहीं,
क्योंकि अक्सर चुप्पी को यहाँ,
कमज़ोरी की निशानी समझा जाता है।
ये लोग क्या जानेंगे तुम्हारे ख़्वाब,
क्या जानेंगे तुम्हारा हाल?
जिनको अपनी ही दुनिया का पता नहीं,
ऐसे ही तो नहीं इन्हें "चार लोग" कहा जाता है!
उड़ो तुम अपनी ही शर्तों पर यहाँ,
कि आसमां भी झुककर तुम्हें सलाम करे,
जो डरते रहे ज़माने की बातों से,
अक्सर उनसे इतिहास नहीं रचाया जाता है!
-नूपुर झा
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