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यहाँ फ़क़ीर के पहले-पहल गुलाम थे हम

                
                                                         
                            हैं आज शाह प पहले यहीं गुलाम थे हम
                                                                 
                            
तुम्हारी सुब्ह से पहले किसी की शाम थे हम

बदन तो बाद का हासिल है कुछ बरस पहले
यक़ीन मानिए आँसू थे इंतिक़ाम थे हम

इसी हुनर से लड़ाई लड़े औ जीते भी
जो दंड-भेद था कोई तो साम-दाम थे हम

अजीब खेल है दौलत का कामयाबी का
कुबूल आज हैं पहले यहाँ हराम थे हम

अजीब धुन मिरे सर पर सवार थी मौला
यहाँ फ़क़ीर के पहले-पहल गुलाम थे हम
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2 सप्ताह पहले

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