ज़िंदगी का सबब उदासी को
लोग कहते हैं अब उदासी को
बस हटा दीजिए ख़ुशी का नक़ाब
देख पाएँगे सब उदासी को
हम नहीं कह सके मगर इरफ़ान
तुमने पहना ग़ज़ब उदासी को
आइना जब उतार देता है
हम पहनते हैं तब उदासी को
दोस्त कल शाम फिर बुला लाए
बज़्म में बेसबब उदासी को
सोचता हूँ कि मुस्कुराने का
वक़्त मिलता है कब उदासी को
मेरे उस्ताद कह रहे थे कल
लोग पढ़ते हैं अब उदासी को
नम मिलेगी मिरी हर इक तस्वीर
हम उतारेंगे जब उदासी को
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X