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जो नही बस वहीं ख्याल होता हैं

                
                                                         
                            मन
                                                                 
                            
मन चाहता सिर्फ मन के अहंकार को ...
कभी नीली बत्ती गाड़ी, कभी मिनिस्टर वाली कार को
मन चाहता है केवल वैभव और विलास को ..
मन चाहता है बड़ी बड़ी बातें तो और कभी झूठी दिलासाएं
मन चाहता सिर्फ मन के अहंकार को...
मन जाता है अक्सर बीते हुए बातों पर,
जो हुआ नहीं ऐसे व्यर्थ संवादों पर
मन भटक जाता है इन्हीं दो बातों पर,
जो हुआ नहीं या व्यर्थ संवादों पर
मन का यहीं चाल होता है,
जो नही बस वहीं ख्याल होता हैं

 
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एक घंटा पहले

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