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अनजान सा रिश्ता

                
                                                         
                            अनजान सा रिश्ता
                                                                 
                            
दिल से जुड़ गया,
गहरा न सही पर
ख्वाबों में बस गया।
खास तो हूँ नहीं
पास वो है नहीं,
जोड़ते हुए तारों को
उसे कोई और मिल गया।
उसके गमों को मैं
मिटा न सकी,
उसकी खुशियाँ मैं
सजा न सकी।
वो खुश है, तो मैं भी हूँ
बस उसकी यादों को
दिल से निकाल न सकी।
वो खास था
हर गम में साथ था,
दूर होकर भी
उसके पास होने का
एहसास था।
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2 महीने पहले

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